भूखंड बनाने के पहले जमीन की परीक्षा कैसे करें
जब भी भवन बनाने के लिए नया भूखंड (जमीन) खरीदनी हो तो उस जमीन की भली-भांति परीक्षा कर लेनी चाहिए। इस परीक्षा से उस भूखंड का विस्तृत विवरण प्राप्त हो जाता है तथा उसकी प्रकृति का पता चल जाता है जिसके आधार पर यह निर्णय किया जाता है कि उस जमीन पर मकान बनाना शुभ रहेगा या अशुभ। इसके लिए शास्त्रों में कई प्रकार की परीक्षाएं बताई गई हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
गरुड़ पुराण में वर्ण के आधार पर भूमि के चार प्रकार बताए गए हैं। श्वेत वर्ण, पीत वर्ण, श्याम वर्ण एवं रक्त वर्ण। इनमें श्वेत वर्ण ब्राह्मणों के लिए, पीत वर्ण भूमि वैश्यों के लिए, रक्त वर्ण भूमि क्षत्रियों के लिए तथा श्याम वर्ण भूमि शूद्र वर्ग के लिए बताई जाती है। हालांकि वर्तमान में वर्ण व्यवस्था धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है, ऐसे में इस नियम का उपयोग थोड़ा परिवर्तन कर दिया गया है। यथा श्वेत वर्ण की भूमि विद्या-अध्यापन से जुड़े कामों के लिए, पीत वर्ण भूमि व्यावसायिक (कॉमर्शियल) उपयोग के लिए, रक्त वर्ण भूमि शस्त्र विद्या सीखने सिखाने संबंधी कार्यों, तथा शूद्र वर्ण भूमि सेवा संबंधी कार्यों के लिए उपयोग लेनी चाहिए।

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