Vaastu Ved

Friday, August 19, 2016

वनस्पति तंत्र

जीवन को सुगम बनाने में उपयोगी वनस्पति तंत्र



जीवन में अनेक समस्याओं को हल करने लिए मानव बाकी उपायों के साथ साथ ज्योतिष व तंत्र का सहारा भी लेता है। ज्योतिष व तंत्र में वनस्पति का भी बहुत महत्व है जैसे कि हल्दी, रूद्राक्ष, कमलगट्टा इत्यादि। अत: इसे तंत्र में एक नवीन शाखा ‘‘वनस्पति तंत्र’’ के रूप में भी जाना जाता है। प्रकृति से प्राप्त ये वस्तुऐं अपनी सकारात्मक ऊर्जा द्वारा मनुष्य के जीवन में भी सकारात्मक वातावरण बनाती है जिसका उपयोग इस वनस्पति तंत्र के अन्तर्गत किया जाता है। निम्रांकित लेख कुछ सुलभ वनस्पति अर्थात पेड पौधों से प्राप्त वस्तुओं के सरल प्रयोग बता रही है जो जीवन के कुछ पहलुओ का उपाय भी साबित होगीं।
कमलगट्टा
यह धर्म और तंत्र प्रेमियों के लिए एक सुपरिचित वस्तु है। इसे पदम बीज के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी की उत्पत्ति कमल से हुई मानी जाती है। यही कारण है कि कमल को समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
कमलगट्टे से बनी माला का प्रयोग धन प्राप्ति के लिए की जाने वाली साधनाओं में मंत्र जप हेतु किया जाता है।
कमलगट्टे को देशी घी एवं सिंदूर के लेप में रंगकर उस पर चाँदी का वर्क लगाकर, उसे पूजा घर में चाँदी की कटोरी या प्लेट में रखना चाहिए तथा प्रतिदिन लक्ष्मी मंत्र का एक माला (108 बार) जप करना चाहिए।
मंत्र निम्नलिखित है-
ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं
कमलगट्टे को गल्ले में रखने से धनागमन प्रारम्भ हो जाता है। विशेष रूप से जहाँ पर कि व्यवसाय बिल्कुल ठप हो गया हो अथवा कोई व्यक्ति नया कार्य प्रारम्भ कर रहा हो ऐसी स्थिति में यह प्रयोग मनोवांछित फल देता है। व्यक्ति को आर्थिक कष्ट नहीं घेरते।
दोमुखी रुद्राक्ष
पौराणिक मान्यता के अनुसार शिवजी के आँसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई थी। शिव को अतिप्रिय रुद्राक्ष का प्रयोग शिव पूजक माला जपने, धारण करने और रुद्राक्ष को ही शिव स्वरूप मानकर उसका पूजन करने के लिए करते हैं अत: रुद्राक्ष को शिव मानकर पूजना युक्तिसंगत ही है। रुद्राक्ष अनेक प्रकार के होते हैं। मुख भेद के आधार पर उनका वर्गीकरण किया जाता है। सभी रुद्राक्षों में दो मुखी रुद्राक्ष को विशेष महत्वपूर्ण मानने का कारण दो मुखी रुद्राक्ष की पूजा शिवस्वरूप मानकर करता है। उसे भगवान शिव ही नहीं माता पार्वती की कृपा भी सहज ही मिल जाती है।
महाशिवरात्रि या शुक्त पक्ष में सोमवार के दिन दो मुखी रुद्राक्ष लेकर उसे गंगाजल से धोकर चांदी के पात्र में रखकर भगवान शिव के मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। उसके बाद रुद्राक्ष माता से अग्रलिखित मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। ऊँ नम: शिवाय
मंत्र जप के बाद अपनी मनोकामना भगवान शिव और माता पार्वती से कहनी चाहिए। ऐसा कहने से व्यक्ति की कैसी भी जटिल कामना हो अवश्य पूर्ण होती है। रुद्राक्ष को घर पर लाकर उसकी शिव स्वरूप मानकर नित्य पूजन करना चाहिए।
मारक दशा के प्रभाव में चल रहे व्यक्तियों को एवं जिन कन्याओंं के विवाह में अनावश्यक विलम्ब एवं बाधाएं आ रही हों, उन्हें यह प्रयोग करना शुभ और कार्य सिद्धिदायक होता है और उनकी कामना पूरी होती है।
लाल चंदन माला एवं ब्रासलेट
चन्दन एक सुविख्यात लकड़ी है। आस्थावान धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए हमेशा से ही चन्दन पूजन सामग्री के रूप में उपयोगी रहा है। चन्दन अपने अद्भुत गुणों के कारण पूजा-पाठ के अतिरिक्त तंत्र-मंत्र-यंत्र के प्रयोगों और आयुर्वेद में भी उपयोगी मानकर प्रयोग किया जाता रहा है। कबीर ने एक दोहे में सज्जन व्यक्ति की तुलना चन्दन वृक्ष से करते हुए कहा है कि जैसे चन्दन के वृक्ष पर सर्प लिपटे रहने पर भी चन्दन का वृक्ष सर्पों के जहर से बचा रहता है और अपनी सुगंध नहीं छोड़ता वैसे ही सज्जन व्यक्ति कुसंगति में भी बुराईयों से बचा रहता है।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग
लाल चंदन की 2 या 5 मणियों को धागे में पिरोकर अपने प्रेमी को भेंट करना चाहिए।
ऊँ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।
ब्रासलेट को बांधते समय भी इस मंत्र का मन ही मन जप करना चाहिए।
इसके प्रभाव से दोनों के मध्य प्रेम गहरा हो जाता है। जिन व्यक्तियों के प्रेम संबंधों को अन्य व्यक्ति समाप्त करना चाहते हों, उन्हें यह प्रयो शुभ रहता है। अपने प्रियजन के हाथ में बांधने से उसका प्रेम और समर्पण भाव आपके प्रति अटूट बनेगा। लाल चंदन ब्रासलेट को स्त्री वर्ग को बंधवाना चाहिए। केवल प्रेमिका ही नहीं, दो महिला मित्र भी एक-दूसरे के इसे बांध सकती हैं।
इसके अतिरिक्त लाल चंदन को साफ पत्थर, स्वच्छ जल के साथ घिसकर उसका तिलक लगाने से भी सामान्य वशीकरण का प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। किसी सभा में जाने से पूर्व यदि लाल चन्दन का तिलक किया जाए तो उस सभा में व्यक्ति को प्रतिष्ठा मिलती है।
जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा हो उन्हें बाजार से कश्मीरी केसर लाकर लाल चंदन के साथ साफ पत्थर पर गंगाजल में घिसकर स्नान आदि से पवित्र होकर माथे पर बिन्दी लगानी चाहिए। यह प्रयोग 7 गुरुवार निरंतर करना चाहिए। यह प्रयोग विवाह शीघ्र कराने में सहायक होता है।
जो व्यक्ति परिस्थितियोंवश अनैतिक व्यक्तियों के साथ रहते हों उन्हें लाल चंदन की माला गले में धारण करनी चाहिए। इससे वह कुप्रभावों से बचे रहेंगे।
तुलसी ब्रासलेट एवं माला
तुलसी का पौधा अपने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं औषधीय गुणों के कारण सुविख्यात है। जिस घर में तुलसी का पौधा हो वहाँ का वातावरण पवित्र रहता है, हर प्रकार की बुराईयों से वह घर बचा रहता है। जो व्यक्ति तुलसी की मणियाँ धारण करता है उसके अंदर पवित्रता का भाव प्रबल रहता है। बुराईयां एवं व्यसन उससे दूर रहते हैं। जो स्त्री अपने प्रियजन के दाहिने हाथ में तुलसी मणियों का ब्रासलेट बाँधती है उसका प्रियजन उससे पवित्र प्रेम करता है। वह उसका साथ कभी नहीं छोड़ता। दो मित्र भी इसे एक-दूसरे के बाँध सकते हैं।
तुलसी की 5 या 7 मणियों के ब्रासलेट को कलाई पर बांधते समय नीचे दिये गए मंत्र का मन ही मन जप करना चाहिए।
ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरूवे नम:
जिन व्यक्तियों पर दायित्वों का भार हो, उन्हें भी तुलसी ब्रासलेट बांधना चाहिए। बुरे विचारों से बचने के लिए कोई भी तुलसी ब्रासलेट को बांध सकता है।
तुलसी माला को गले में धारण करने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व सरल, पवित्र और प्रभावशाली बन जाता है।
गुंजा
तंत्र जगत् की प्रभावशाली वनस्पतियों में गुंजा का नाम लिया जाता है। यह सर्वत्र सरलता से सुलभ नहीं होती। सामान्यत: गुंजा के बीज लाल रंग के होते हैं। अल्प मात्रा में सफेद और काली गुंजा भी प्राप्त होती है। काली गुंजा को दुर्लभ माना जाता है।
परिवार में सभी लोगों के मध्य परस्पर प्रेम, सहयोग एवं समर्पण का भाव बना रहे इसके लिए घर के मुख्य द्वार पर पांच अथवा सात गुंजाएं नए लाल वस्त्र में बांधकर शुक्ल पक्ष में रविवार के दिन लटका देनी चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति से रुपया वापस लेना हो तो ऐसे व्यक्ति से भेंट करते समय अपने पास लाल गुंजा के 5 एवं काली गुंजा के 2 दाने जेब में रखने चाहिए तथा बातचीत के दौरान किसी प्रकार उन्हें जेब इस प्रकार निकालें कि उस व्यक्ति की दृष्टि उन पर पड़े। उसके बाद उन दानों को दूसरी जेब में रख लेना चाहिए। इससे शीघ्र ही धन वापस मिलता है। धन प्राप्त होने के पश्चात गुंजा के दानों को किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए।

वास्तु गुरु आचार्य अनुपम जौली, www.vaastuved.com


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